Sarthak Pagalpan

“कुहनी में टिके हुए लोग
सुविधा में बिके हुए लोग
बरगद की बात करते हैं
गमलों में उगे हुए लोग”

“जब प्रदर्शन नीरस होगा
तो शायद हमारे हिस्से में
बेहतर कुछ नहीं आएगा”

“शौक,जूनून और सार्थक पागलपन ही
इकट्ठा होकर कुछ झकझोर देने वाला बना पाता है”

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